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Career in pharmaceutical sciences

फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल साइंसेज या फिर फार्मेसी की वह शाखा है जहाँ दवाइयों की डिजाइनिंग तथा डेवलपमेंट से लेकर उनके निर्माण तक के काम में आने वाली तकनीकों का ज्ञान दिया जाता है।
 
लगभग सभी फार्मास्यूटिकल संस्थानों को ऐसे फार्मास्यूटिकल इंजीनियर्स की आवश्यकता होती है जो प्रोडक्ट की डिजाइनिंग से लेकर पैकिंग तक के काम को पूर्ण दक्षता के साथ संभाल सके।
 
फार्मास्यूटिकल इंजीनियर्स प्रोडक्ट डिजाइनिंग और डेवलपमेंट, प्रोसेसिंग, मशीन्स, मैनेजमेंट, क्वालिटी कंट्रोल और संस्थान के लिए जरूरी नियमों की जानकारी रखते हैं। फार्मास्यूटिकल साइंसेज में इंजीनियरिंग करने पर बीई, बीटेक या बीएससी की उपाधि मिलती है।
 
फार्मास्यूटिकल इंजीनियर बनने के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यताओं में बारहवीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री तथा मैथ्स विषय होना जरूरी है। इसी ब्रांच में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए फार्मास्यूटिकल साइंसेज में बीई, बीटेक या बीएससी की उपाधि होना आवश्यक है।
 
इंडस्ट्री में फार्मास्यूटिकल इंजीनियर्स की हर स्तर पर जरूरत होती है जैसे की न्यू ड्रग रिसर्च, ड्रग डिलीवरी सिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और लेबलिंग, मैनेजमेंट, क्वालिटी कंट्रोल आदि। सरकारी या निजी ड्रग टेस्टिंग लैब में एनालिस्ट, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में मैन्युफैक्चरिंग केमिस्ट तथा क्वालिटी कंट्रोल डिपार्टमेंट में भी जॉब पाया जा सकता है।
 
सरकारी सेवा में ड्रग इंस्पेक्टर का जॉब भी पाया जा सकता है। फार्मासिस्ट के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएँ दी जा सकती है जैसे कम्युनिटी फार्मासिस्ट, हॉस्पिटल फार्मासिस्ट, आदि। टीचिंग के क्षेत्र में भी काफी संभावनाएँ देखि जा सकती है।
 
सभी क्षेत्रों में कार्य करने पर अच्छा वेतन पाया जा सकता है। पदोन्नति की भी अपार संभावनाएँ इस क्षेत्र में हैं परन्तु पदोन्नति व्यक्तिगत कार्यकुशलता पर निर्भर करती है। जिस व्यक्ति में डिग्री के साथ-साथ जितना कैलिबर होता है उसके लिए सफलता की ऊंचाईयों को छू पाना उतना ही आसान होता है।
 
Career in pharmaceutical sciences


on January 12 at 9:39

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