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career in automobile industry

भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का देश की जीडीपी में 22 प्रतिशत का योगदान है तथा यह सालाना लगभग 215 लाख व्हीकल्स का उत्पादन करती है। अगर विस्तार की यही रफ्तार रही तो 2020 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो उत्पादक देश बन जाएगा।
 
फिलहाल लगभग 2 करोड़ लोगों को ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में रोजगार मिला हुआ है तथा अगले 10 वर्षों में लगभग 3 करोड़ प्रोफेशनल्स की आवश्यकता और पड़ेगी। केंद्र सरकार ने भी ऑटो इंडस्ट्री के प्रोत्साहन के लिए इसमें 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति प्रदान कर दी है। छात्रों के लिए यह क्षेत्र करियर का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
 
ऑटो इंडस्ट्री में प्रवेश के लिए अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं। ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और डिजाइनिंग के अंडरग्रेजुएट तथा पोस्टग्रेजुएट कोर्स देश के बहुत से संस्थानों में मौजूद हैं। छात्र विज्ञान विषय में बारहवीं या फिर किसी भी विषय में स्नातक करने के पश्चात प्रवेश ले सकते हैं। अधिकतर संस्थानों में एंट्रेंस एग्जामिनेशन के जरिये प्रवेश मिलता है। ऑटो इंडस्ट्री में मैनेजमेंट या फिर रिटेलिंग से सम्बंधित कोर्स करने के लिए किसी भी स्ट्रीम का स्नातक आवेदन कर सकता है।
 
इस इंडस्ट्री में नौकरी के अधिकतर अवसर निजी क्षेत्र में ही होते हैं क्योंकि सरकारी क्षेत्र की भूमिका ऑटो इंडस्ट्री में बहुत सीमित है। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेंटर्स, इन्शुरन्स कंपनियों तथा ट्रांसपोर्ट कंपनियों में बहुत से अवसर मौजूद रहते हैं। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में डिग्री तथा डिप्लोमा, डिजाइनिंग, एमबीए, रिटेल ऑफिस मैनेजमेंट आदि का कोर्स करने वाले छात्रों को बहुत अवसर मिल सकते हैं।
 
ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग या फिर डिजाइनिंग का कोर्स करने वाले छात्रों को 4 से 5 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरियाँ आसानी से मिल जाती है। इसी तरह सेल्स तथा सर्विस डिपार्टमेंट में भी 2 से 3 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरियाँ मिल जाती है। छात्रों के पास अगर इंजीनियरिंग के साथ-साथ मैनेजमेंट की डिग्री भी हो तो कम्पनियाँ उन्हें बेहतर पैकेज के साथ-साथ वरीयता देती हैं।
 
career in automobile industry


on January 12 at 9:22

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